Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Sunday, 19 November 1978

ज़माना क्या गायेगा ?


______________________________________________________

मेरे कवित
जब हो शके ना
तुम्हारे गीत ,

ज़माना क्या गायेगा  ?

        उठी ना तर्रन्नुम
        तुम्हारे ओठ से ,

उंगलिया तुम्हारी
क्यूँ रुक गई
छू कर
मेरे ह्रदय के साज़ को  ?

        ज़माना क्या दोहरायगा
        तरज़ लिखही जो मैंने  ?

रहे खामोश पायल
जब तुम्हारे ,

छोड़ के कवित मेरे
बेसहारे

---------------------------------------------------------

19  Nov   1978


____________________________________________________



       

Sunday, 12 November 1978

खामोशी से क्यूँ भरते हो


________________________________________________________________________________

तुम ना आओंगे
ये भी क्या सच हो शकता है  ?

कभी
बहुत कम कभी
तो मिलते हो  !

       कौन सी थी वो
      आखरी बार ,
      मिलाके आँख से आँख
      आपने देखा था ?

जब गम्मों  से हम ना डरे ,
मिलन की वो चन्द घडियां
खामोशी से क्यूँ भरते हो  ?

        मेरी - तुम्हारी
        और कौन सी दुनिया है  ?

_____________________________________________________________________________


Monday, 6 November 1978

कौन रोकेगा मुज़े


_________________________________________________________________________________
चाहा अगर मुक्कदर ने
मिले ना तुम्हे इस जहां में ,

कौन रोकेगा मुज़े
मौत की मंज़िल पर
मिलने से तुम्हे  ?

वादा नीभाओंगे  ?


_______________________________________________________________________________