Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Tuesday, 29 December 2015

मेरे अश्को की माला





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क्या ज़फ़ा हुई मुज़से 
की 
महफ़िल छोड़ कर चल दिए  ?

तेरे लिए जो लाया 
वो तोहफा ,
बातों की नहीं 
मेरे प्यार की पेशकश थी  !

बयाँ न कर पाया 
वो बातों का क्या  ?

जिस के अंत तक न पहुँच पाया 
उन बातों का क्या  ?

तुमने तो छिपा लिया 
परछाईओं में चहेरा  ;

तो मेरा भी छिपा हैं 
रात की गहराईओं में  !

जितना चाहे 
सताने दो 
इन रात के अँधेरे को ,

इन्हे क्या पता 
कब्र के अँधेरे 
जगा न पायेगे  !

तुम्हारे बुलाने की राह में 
बैठा हूँ ;

तुम्हे 
मेरे अश्को की माला 
पहना ने की राह में 
बैठा हूँ  !

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30   Dec   2015

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Monday, 28 December 2015

सभी तो अपने ही थे !



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ना तुम कर पायी
ना मै कर पाया
रिश्तो का सौदा  ;

किस का सहारा छोड़के
किस का बन पाते  ?

सभी तो अपने ही थे  !

उनके भी कुछ
सपने भी थे  !

न तुम कर पाई
न मैं कर पाया
सपनो का सौदा  !

क्या बिरानो से हो शकता है
बहारों का सौदा  ?

दीवारो तो गिरा शकते थे
मगर
उस खड़र में क्या सो पाते  ?

गीला करे तो तक़दीर का
मुक्कदर से शिकवे सिवा
क्या और कुछ कर पाते  ?

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29   Dec   2015

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Friday, 18 December 2015

मेरा पलड़ा भारी हैं !



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कैसे कटी ये रात 
ए कौन जाने  ?

किस सोच में बीती ये रात 
ए कौन  जाने  ?

सोचता रहा 
तराज़ू उठाऊ तो कैसे  ?

आरज़ू ओ से भरा 
पलड़ा तेरा ,
कैसे उठा पायेगा 
मेरे गमो का पलड़ा  ?

कैसे भूला पाऊं 
उस दिन की याद ,
जब आँखे उठाए आसमान की और ,
तू मुज़े ढूंढती थी  ?

तुम्हे ढूंढते आज मेरी आँखे 
सितारों से हठती नहीं  !

रात मेरी कटती नहीं  !


जब मंज़िल ना मिली 
तब मैंने 
यादों के तराज़ू उठा लिया है ,


मेरा पलड़ा भारी हैं  !

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Monday, 14 December 2015

कौन सा असूल था ?


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क्या भूल थी  ?
तुम्हारी महफ़िल में 
बिन बुलाये 
चले आये 
वो क्या , मेरी भूल थी ?


क्या सज़ा थी  ?
शराब -इ -इश्क  के बदले 
भर दिया गमो  का जाम ,
क्या मेरी इस खता की 
सज़ा थी  ?

क्या मैंने कभी 
शिकवा किया  ?

तो फिर ,
महफ़िल अधूरी छोड़ कर 
पैरों से घुँघरू तोड़ कर ,
चले जाना ,
ये भी तुम्हारा 
कौन सा असूल था  ?

मैंने तो लबो सी लिए हैं ,
जलते चरागों को बूज़ा दिए हैं ,

इश्क ना ही सही 
गमो के सहारे जी लिए हैं  !

मानो या न मानो 
तुम्हारे यादो की बरात में 
दूल्हा तो मैं ही हूँ  !

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#   15  Dec  2015 

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Saturday, 12 December 2015

मुज़े कौन पहचानता ?



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तुम्हारे बिना मुज़े कौन पहचानता  ?

शीरीं के बिना
फरहाद को कौन जानता  ?

मुज़े कोई ना भी पहचाने तो
गीला किसीका नहीं ,

तुमने मुज़े जाना
वो जहां से कम नहीं  !

कुछ सवालात है
तो खुद से  ;

अफ़साने थे वो ,
तुमसे
क्यों न बयां कर पाया  ?

जो मुरादे दिल में रही
लब  पर आके , जो रुक गई ,
वो तो मेरी खता थी  !

क्यों न बन पाया मैं ,

लैला का मजनू  ?
सोहनी का महिवाल  ?
हीर का रांजा  ?
शेणी का विजानंद  ?

अगर बन भी पाता तो
क्या कुछ बात बनती  ?


जब
ज़माना इन्हे भूल पाया ,
हमें भी भूल पाता  !

जो ज़ुल्म तुम पर हुआ
वो मैंने किया है

ज़माने ने नहीं  !

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#   13  Dec   2015


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Wednesday, 18 November 2015

आभास ही आभास है


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कभी तो आया करो 
रूबरू ना ही सही 
सपनोमे तो भाया करो ;

छू  शको  ना जिस्म को मेरे 
रूह पर तो छाया करो  !

कैसी आश लगाए बैठा हूँ  !

जिस तरफ देखू वहाँ 
आभास ही आभास है  ;

मेरे निश्वाश से बने 
घने कोहरा में 
छिपा है वह ,
तेरा मेरा राज़ है  !

अगर साथ साथ चलते 
तो राज़ कैसे रहता  ?

दुनिआ की निगाहों से 
तेरे मेरे प्यार को 
कैसे छिपा पाते  ?

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19  Nov  2015  /  #


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Wednesday, 11 November 2015

नया खेल : नया दाव


https://youtu.be/e3gk_1vAgkU



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बहुत खेला ,  ओ ज़माना  ,
अब खेल कितना बाकी हैं  ?

कब तक करू ए लुकाछिपी ,

कितने दाव  देने बाकी है  ?

जब थक गया तब

करी कुछ बेइमानि ,
गिनती में कुछ बेवफा होके ,
गद्दारी भी खुद से करी  !

तो कभी चौराहे पर आकर

भूला भी कहाँ जाना है  ,
बस चलता रहा  !

किया , जितना कर पाया

किया , जैसा आया
कुछ भाया
तो ज्यादातर गवाया  :

नाचता भी रहा

जैसे तूने नचाया ;

अब बहुत हुआ ,

अब क्या बाकी है  ?

चलो मैंने मान लिया :


 " तुम जीते , मैं हारा  "


अब तो छोडो  !


अगले जनम में भी

कुछ दाव देना बाकी हैं  !

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Original Gujarati /  09  Aug  2014

Hindi Translation  /  12  Nov  2015 

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નવી ઘોડી , નવો દાવ

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ઘણો દાવ આપ્યો દુનિયા 
હવે કેટલો બાકી છે  ?

સાતતાળી રમતાં થાકયો દુનિયા ,

કર હજી 
કેટલો બાકી છે  ?

આળસી જઈ અંચી કરી 

ગણવાં મા પણ ગંચી કરી ,

ખપાવી પાંચને સાતમાં ,

ખુદને છેતરતો રહયો  :

સંસારની ભૂલ ભૂલામણી મા 

ભમતો રહયો  .

જેટલુ આવડ્યું તેટલુ કર્યુ 

જેવુ આવડ્યું તેવુ કર્યું 

ગમ્યું તે તો કર્યું 

પણ 
ના ગમ્યું તે પણ કર્યું 

નચાવ્યો જેમ તેં , નાચ્યો ;


હવે તો 

દાવ મારો , ઉતારી દે

" હાર્યો ? કબૂલ ? "  કહીને 

ઉગારી દે 

પછી 


કહેવું  હોય તો કહેજે 


" નવી ઘોડી , નવો દાવ "

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Monday, 9 November 2015

कुछ पल ऐसी भी आई


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गया जो ज़माना
फिर वो आ नहीं शकता ,

आनेवाला है जो ज़माना
मेरे गुजरने  बिना
जा नहीं शकता  !

कुछ पल ऐसी भी आई
जो आजतक
जाने न पाई ,

अकेला ही सही
इन्ही के सहारे चला हूँ  ;

ना अब कोई
मँज़िलोंको ढूंढना है
ना कोई मोड़ पे मुड़ना है

बस चलते रहना है
कभी ना कभी
जब रास्ता ही रुक जायेगा
तब रुकना भी है  !

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09  Nov  2015  /  #


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Sunday, 8 November 2015

क्या जवाब देती ?


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अगर तुम पूछते ,
" मुज़े क्यों याद करते हो ? "

तो मैं क्या कहेता  ?
चुप ही रहेता  !

जैसे किसीने पूछा ,
" तुम सांस क्यों लेते हो ? "

मैं भी पूछ शकता हूँ ,

" तुम्ही बताओ ,
  तुम्हे कैसे भुलाऊँ ? "

तो तुम क्या कहेती  ?
क्या जवाब देती ?

या ,
शर्मसे आँखे ज़ूका लेती  ?

अगर तुम पूछती ,
" क्या तुम मुज़े प्यार करते हो ? "

तो क्या इकरार करता ?

या पलट के पूछता ,

"  तुमने किसीको चाहा कभी  ? "

तो क्या ,
अंदाज़ से  ही बता देती  ?

या
कुछ बोल भी पाती  ?

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09  Nov  2015 /  #

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क्या राज़ हैं ?


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क्या राज़ हैं  ?
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लोग पूछते है :
तुम्हारे ग़मोका क्या राज़ है  ?

मैंने कहा :
बतादू तो कैसे बचेगा राज़  ?

मुड़कर पीछे देखने की
हिम्मत नहीं मुज़मे ;

मेरे लिए  एक ही राज़ है :

जिस मोड़ पर तुम रुक गई
वहाँ क्यों न रुक पाया मैं  ?

क्यों चलते रहे मेरे कदम  /

लोगो  को  क्या कहूँ  !

उनके लिए जो राज़ है
वो तो मेरी
ज़िंदगी की
बची हुई आश हैं  !

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06 Nov  2015  #

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Saturday, 7 November 2015

कौन थे तुम्हारे ?


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कौन थे तुम्हारे  ?

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 थे जो कभी
तुम्हारी आँखके तारे
वो तो तुम्हे भूल पाये ;

कैसे भूलूँ मैं  ?

मैं तो हूँ
तुम्हारे अस्तित्व का
बचा हुआ
एकलौता बहाना  :

देखना चाहो तो
देखलो मेरी आँखोसे ,

कौन थे तुम्हारी
आँखके तारे ,
और कौन था
तुम्हारा
तकदीर का मारा  !

अब तुम्हे कुछ फर्क  नहीं ,
करे या ना करे
कोई याद ,

मुज़े फर्क हैं

मेरी यादों में
मेरे बचे हुए इन  सांसो में
तुम्हे ज़िंदा रखना हैं

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03  Nov  2015  /  #

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Friday, 30 October 2015

तुम्हे कैसे भुलाऊँ ?


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तुम्हे कैसे भुलाऊँ ?

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इन हवाओं में
कभी बहेते थे
तेरे मेरे इश्क के ख्वाब  ;

इन्ही हवाओं में
चुभती हैं आज
मेरे ग़मों की ख़ाक  ;

आज भी बुलाता हूँ तुम्हे

तुम्हारी छवि लेकर हर शाम
दिल को रूलाता हूँ  ;

खुद को बेखुद कर पाया
मगर
तुम्हे कैसे भुलाऊँ ?

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30  Oct  2015 #


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Wednesday, 23 September 2015

आखरी प्रश्न



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आखरी प्रश्न
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तेरी आँख के आयने में 
झाँख के देखना चाहा ,


क्या लिखे विधि ने 
लेख 
ललाट में मेरे  !


देखा तो सिर्फ 
नि : सिम वेदना का सागर 
उबलता हुआ एक 
असीम यातना का उदधि  !


विधि के लिखे लेख में 
शब्द ना थे :

था तो एक प्रश्न 
तेरे अधूरे अस्तित्व का ,


लिख दिया जो नसीब था मेरा 
आखरी प्रश्न उसका ,

मैं क्यों अकेला  ?

तुम कहाँ  ?

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Original Gujarati  /  28  August  2014

Hindi Translation /   24  Sept  2015

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આખરી પ્રશ્નાર્થ 

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તારી આંખના અરિસામાં 
આંખ માંડી ,
- જોવાં 
વિધિએ શું લખ્યાં લેખ 
લલાટમાં મારા  ;

જોયો ફક્ત 

નિ : સિમ  વેદનાનો સાગર 
ઉછળતો 
અસિમ યાતનાનો ઉદધિ  ;

વિધિ ના લખેલા  લેખમા 

શબ્દો ન્હોતા ,

હતો ખાલી 

તારા અધૂરા અસ્તિત્વ નો 
સવાલ ,

મારાં લખેલાં નસીબનો 

હતો 
એકલો , અટુલો 
આખરી પ્રશ્નાર્થ 

Saturday, 22 August 2015

मन के गुंबज से






________________________________________________________________तुम मुज़े मनाओ भी तो 
कैसे मान लू ?

लहू के रंग से लिखे 
वो गीत भी गाउ ,

तो कैसे गा  लू  ?

बजाने जाऊ तो 
बजने लगे बेसुरे 
ह्रदय के साज 

मन के गुंबज से 
टकरा कर उठे आवाज़ जो 

वो तेरा ना सही 
मेरा भी तो नहीं  !

कहाँ हो तुम प्रिये  ?

चढ़ाता रहूँ पूजा के फूल 
समज़ कर मेरा अर्घ्य 
करलो कबुल 

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Original Gujarati /  04  Feb  1978

Hindi Translation  /  22  Aug  2015

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મૌન ના પડઘાં પડે 
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મને તું મનાવે
પ્રિયા ,
પણ કેમ માનું ?

રુધિર ના રંગે
લખેલી
કવિતા ને કેમ ગાઉં  ?

બજે બેસૂરા
હૃદય ના સાજ આજ ,

મૌન ના પડઘાં પડે
મન મંદિરે  --

પ્રિયા ક્યાં ?
પ્રિયા ના  !

પાષાણ ની પ્રતિમા
પૂજા ના અર્ઘ્ય ને શું અડે ?

Monday, 3 August 2015

कहे भी तो किसको ?



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ज़माना क्या जाने  ?



ज़माना तो ये माने
पालखी उठा के चला प्रीतम ,



प्रिया जाने ,
प्रीतम के पैर क्यों लड़खड़ाये  !



पालखी ना ,
चला इश्क आज
मन की मैयत उठाये  !



कहे भी तो किसको  ?



बैठी जो पालखी में प्रिया
न देख पाये
न आंसू रोक पाये ,



कहे भी तो किसको  ?



ज़माना क्या  समजे


मधु - रजनी नहीं ,
बिरह की
कभी ना ख़त्म होने वाली
रात को  !


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Original  Gujarati  /  20  Feb  1978

Hindi Translation  /   04  August  2015


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કહ્યું નાં કોઈને

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પાલખી ઉઠાવી
પ્રિયા ની
એક ' દિ ચાલ્યો ;

કહ્યું નાં કોઈને
પ્રિયતમ ,
મન તણી મૈયત ઉઠાવી .

Saturday, 1 August 2015

तेरे गले के हार में




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मिल जाय जहां
आकाश और धरती

घुल जाय जहां
जल और धरती ,

दिशाओ का जहां
न नामोनिशां

वहां कब्र मेरी  ;

जिजीविषा  ,

कर ले कबुल
ये मेरी
आखरी सलाम  !

मनावु तुज़े तो कैसे  ?
होनी को अनहोनी
बनावु तो कैसे  ?

बनेगी न बात
समजावु तुज़े
तो कैसे  ?

मन की गहराईओं से निकला
जो मोती
उसे समालु तो कैसे  ?

सनम ,

मेरे घुंटते सांस पर
बनी जो बोज़
उठाले  इस ज़िन्दगी को 

तेरे गले के हार में
हो शके तो ज़ुमने दे
मन के मेरे मोती को  !


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Original  Gujarati  /  26  Feb  1978

Hindi translation  /  02  Aug  2015


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તારા હ્રદય પર ઝૂમવા દે

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ધૂંધળા મળી જાય જ્યાં
આભ ને વારિ ,

જળ સ્થળ એક થઇ જાય જ્યાં
ત્યાં કબ્ર મારી :

જીજીવિષા
આખરી સલામ  !

અસંભવ થી ઝૂઝવા
હવે નાં હામ ;

સાંચવી સાંચવી
સંઘર્યું ,
માન્યું પણ મોતી
મહેરામણ નું
જીવન જે ;

આજ ઘૂંટે છે
પ્રાણ ને ,
ઉઠાવી લે પ્રિયા
બોજ આ  ;

તારી ગ્રીવા માં
તારા હ્રદય પર
ઝૂમવા દે ;

રતિ હે ,
ઉંડાણ તારા અંગના
અનંગ ને
ચૂમવા દે ;

ઘડી હવે એક મારી
તારી કદાચિત  બેઘડી ,

પછી ખોલશે લોચન
સંહાર નો સ્વામિ  :

શું ભસ્મ થી
પાંગરશે
સૃષ્ટિ ફરી ?

तुम्हारा ही जलवा !


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क्यों पूछते हो ,

मेरे भी कुछ हैं
इरादे , अफ़साने , अरमां ?

हुआ जो लाल
जल कर ,
अरमां के अनल पर
वो , मेरा ही दिल है !


तुम न पहचान पाओगे
तुम्हारा खुद का चहेरा !


हर एक शोले में
मैंने तो देखा
तुम्हारा ही जलवा !


हकीकत को कैसे बदल दु ?

कद्रूप मेरे चहेरे में
क्या तुम्हे कोई देख पायेगा ?


तुम्हारी मांग में
भर शका ना सिंदूर
मेरे कफ़न पर
क्या रंग लाएगा ?

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Original Gujarati / 20 Sept 1978
Hindi Translation / 01 Aug 2015

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પૂજાશે પાળીઓ પ્રેમ નો

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ઈજનેર ને વળી ,
ઉર્મીઓ ના ઓરતા શું ?

બન્યું જો તપ્ત હૈય્યું ,
અનલ અરમાન ની ભટ્ઠી એ ,
પામવા આકાર --

     પ્રિયા ની મૂર્તિ નો
     આછો કંઇ અણસાર  ;

ઠંડુ કરી દે
વિરહ નાં હિમ વાયરે ,
હકિકતો ના
ઘણ ઝીંકી દે  --


    બેડોળ સૂરત જે બને ,
    પૂજાશે પાળીઓ પ્રેમ નો
    સિંદૂર રંગે ,
    સંસાર ની સીમ માં .

Wednesday, 29 July 2015

तुज़े क्या दु ?



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तुज़े क्या दु ?

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जिसे कहे शकु मेरा 
कुछ न बचा ,


तुज़े क्या दु ?

तू देवता ,
तेरे मंदिर के आँगन में
बैठा मैं भिखारी ,

तुज़े क्या दु ?

ज़माना ने किया
जिससे किनारा

मैं हूँ वो कुष्ट रोगी !

मेरे नंगेपन की शर्म को
छुपाऊँ तो कैसे ?

तू ठहरा
पत्थर का देवता 
,
तुज़े क्या दु ?

ज़िंदा होना है ?

तो मांगलो ,
बचा जो मेरा
प्राण दु

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Original Gujarati / 16 Nov 1978

Hindi Translation / 30 July 2015
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આપું તને શું ?

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મારું કહી શકું
નથી રહ્યું તેવું -
તને શું આપું ?

બિછાનું પાથરી
બેઠો ભિખારી
મંદિર પ્રાંગણે ,
દેવ ને અર્ઘ્ય
શું આપે ?

હું કોઢીઓ
જગતભર નો ઢેઢીઓ ,

છુપાવવા મુખ મથું
મારી શરમ ને ચિંથરે ;

આપું તને શું ?

તું દેવ ,

પથ્થરતણી પ્રતિમા
તારે કદી જો જીવંત થાવું ,
માગજે
મારા પ્રાણ આપું .

Saturday, 18 July 2015

तेरी चुनरी की किनार है काली




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तेरी ओढनी है काली 

पर
पालव रंग गुलाल ,

हर दोरे में सींचा मैंने
रंग लहू का लाल ,

ये कैसे मुमकिन ?

मेरी जो है कर्क राशि
और मेरा लहू है काला !

हो शकता है आंसू ओ से सींचा
मेरे आंसू ओ का रंग लाल !

इन आंसू ओ से उठती है
एक आग बिरह की,

जल जाता हूँ तो
रहे जाती हैं
ख़ाक बिरह की ,

ललाट से जो उठती है
वो अग्नि शिखाए
भस्म करेगी
अनंग को ,


तुम्हारी मांग में
भर ना पाया
सिन्दूर
ये सोच के ,

मीरा का जो कहान
वही तेरा सुहाग ,

तेरी मांग में
सिन्दूर नहीं 

मोहन के प्रेम की
श्याम के काम की
ख़ाक भर दू ,


तेरी चुनरी की किनार है काली ,

पर तेरे कहान की कांबली का
तू सफ़ेद धागा

मेरे काले रंग से
तू गोरी !
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Hindi Translation / 18 July 2015
Original Gujarati  /  Tuesday, 2 October 1979

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તારી ચુંદડી ની છે કિનાર કાળી

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તારી ઓઢણી ની કાળી કિનાર
મારાજ લોહી થી રંગેલ છે :

મારી કર્ક રાશિ
તેથી જ મારું લોહી કાળું છે !

પણ મારા આંસૂ ઓ નો રંગ
લાલ છે ,

એમાં જે વિપ્લવ ની આગ
ભડકે બળે છે ,
મને જ બાળે છે ;

મારા લલાટે ઉઠતી અગ્નિશિખા થી
આજે ,
મારો જ કામદેવ
રાખ થાશે ;


સિંદૂર તો આપી શક્યો ના ,


પણ તારો તો સુહાગ છે
મીરાં નો ,

તારે સેંથે તો
મોહન ના પ્રેમ ની
શ્યામ ના કામ ની
ભસ્મ જ શોભે ;


તારી ચુંદડી ની છે કિનાર કાળી :

પણ તારા કહાન ની કાંબળી નો
તું સફેદ દોરો ,

મારા શ્યામ રંગ થકી
તું ગોરો , ગોરો .