Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Monday, 15 May 2017

जब चलेंगे अगली बार



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कल होगा 
इक घर नया ,

होगा नया दौर ;

आदते भी छोड़नी होगी पुरानी 
कुछ होगी नयी सजानी  :

सामान का क्या  ?
नया आ जाएगा  ;

पर बीती पलों की याद को 
साथ ले जाएंगे  !

हम तो ठहरे मुसाफिर ,

जहाँ से आए  
उस जगह का पता नहीं  !

जहाँ जाना है 
वहां से कभी 
वापस न आना है !

जब चलेंगे अगली बार ,
न सामान होगा 
न यादे ,
सब कुछ छोड़के ,  
अकेले ही जाना है  !

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15  May  2017

Tuesday, 9 May 2017

वहाँ तो लहरा रहां था



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लोगों शराब पी लेते हैं ,

मुझे न कोई जाम देने वाली,
इस लिए ,
मैं तो 
बहाने बना लेता हूँ ,

तुम्हारी याद भुलाने 
ज़माने को क्या क्या 
खत लिखता हूँ  !

जानते हुए की 
बहुत कम पढ़ेंगे ,
पढ़ेंगे वो क्या समझेंगे  ?

बिना पढ़े मेरे कवित
क्यों कर 
तूने मुझे पहचाना ?

शायद मेरी आँखों में झाँखा  ?

और देखा ,
वहाँ तो लहरा रहां था
एक आंसू ओ का दरिया ;

न तू उसे भूल पायी ,

ना मै भुला हूँ 
उन रसीले ओठों से ,
रह रह कर उठे 
वो लब्ज़ ,

" पिया , पिया "

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09  May  2017