Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Friday, 28 July 2017

बात मेरी बन गयी



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फिज़ूल बातों में 
एक उम्र कट गयी ,

तुम्हे जो कहनी थी 
वो बातें ,
दिल में ही रह गयी  ;

गाता रहा 
बहेरे ज़माने के सामने ,

वो क्या बताता 
जो सुन न पाता  ?

'गर गूंजता तुम्हारे कान में 
गीत मेरे ,

और गुनगुनाती 

" तुम प्रीत मेरे ",

तो समज़ता 
तू सब समझ गयी ,

कुछ कहे बिना 
बात मेरी बन गयी 

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29  July  2017

Wednesday, 12 July 2017

न अब होना है सवेरा



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घनी रात में 
हवा का झोंका आया ,

जलाया था जो दिल में 
चराग ,
वो बुझाया :

बची है बाती 
और बाती से उठता धुआंह  ;

अन्धेरा भी घेरा हुआ  !

न अब 
होना है सवेरा ,

है तो अब 
सितारों के  साथ 
बसेरा  

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13  July  2017

Sunday, 9 July 2017

लिखा है जो नाम तेरा



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कहने को तो ज़िंदा हूँ ,

सच कहु तो ,
अपने आप से शर्मिन्दा हूँ  !

जिस बुलंदियों को छूना चाहा 
उस तक तो 
आँख भी 
न उठा पाया  !

तुम्हारे पांव को तो 
छूने दो  !

मुझे तुम्हारी आँख से तो 
गिरने दो !

लिखा है जो नाम तेरा 
दिल पे मेरा ,
गमो के अश्क से तो 
न धो पाउँगा  !

ज़माने से छुपाने की 
कोशिश करता हूँ ,

तुमसे कैसे छुपाऊंगा ?

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10  July  2017