Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Friday, 24 November 2017

दरवाजे तो आज भी खुल्ले है

https://youtu.be/-BjWu1XD3pY


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तुम्हारे इंतज़ार में
मैंने ,
दिल के दरवाजे खोल रखहे थे ,

मुझे क्या पता
तुम छिपके
आँखों की खिड़की से ही
झाँख लोगी  !

दरवाजे तो आज भी
खुल्ले है ,
पर
न तो कोई आता है
न जाता है  !

भला ,
खण्डेर के सन्नाटे को 
कौन सुन शकता है  ?

अब तो मैं 
कभी तुम्हारा नाम लेके 
गीत गुनगुनाता हूँ 
तो 
खुद ही सुन लेता हूँ  !

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25  Nov  2017

Sunday, 12 November 2017

इंतज़ार करोगी ?




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आज की  शाम 
तेरा नाम लेकर  आयी ,

बिना लिए तेरा नाम 
ऐसी सुब्हा तो 
कभी ना आयी  !

किये बिना आवाज़ 
मेरे ओठ फड़फड़ाते है ,

ज़माना न जाने 
किसके 
गीत गाते है  !

कुछ क़र्ज़ बाकी हैँ 
उसे 
चुकाता चला जा रहा हूँ ,

मेरे  आने का 
इंतज़ार करोगी ?

काश !
ये जानता की 
तुम्हे कितना इंतज़ार कराना 
बाकी है !

मैं ने तो 
तुम्हारे इकरार के सहारे 
उम्र गुज़ार दी  !

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13  Nov  2017




Thursday, 2 November 2017

मुझे मौन ही रहने दो

https://youtu.be/_5R4QIOtIo0



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अब कहेनो को कुछ नहीं बचा

जो कहना था
वो तो , बार बार कह चूका  !

तुम
क्या सून पायी और क्या नहीं ,
वो भी पूछ लिया  !

अब तुम
ना सून  शकती  हो
न देख पाती हो ,

फिर किसके लिए
गीत गाऊं  ?

और जो देख पाएंगे
क्या वह समझ पाएंगे ?

मुझे मौन ही रहने दो  !


तुमसे  मिलने के बाद
गाता रहूंगा

आज तो ए वादा करने दो  !




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03  Nov  2017