Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Saturday, 29 April 2017

बारमासी की तरह




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पहेले भी कभी खड़ी  थी 
यही  दिन 
आगमन के द्वार में ,

लिए हाथ में 

कली एक करेन की ,

क्या मुझे देना चाहा था ?


की ये भी कोई बहाना था ?


जो कहे शकी ना लब्ज़ो में 

वो भी क्या 
अफ़साना था !

भोर होने से पहले 

क्यों 
आज भी आयी हो ?

मुझे जगाने ?


पर मेरे सोये हुए भाग को 

न तुम जगा पाओगी ,

ना तुम्हे 

मैं भूल पाउँगा 

पर तुम्हे याद करते 

न अब 
जिगर में जलन है ,

है तो खाली 
दिल की गहराईओं में 
अकेलेपन का अहसास ,

पर बारमासी की तरह 
उस शुक्र का हूँ  
शुक्रगुज़ार !

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01  May  2017





Thursday, 20 April 2017

लेने होंगे जनम कितने ?



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कैसे बुरा मानु ,
की तू 
कह न पायी ,
कौन था तुम्हरे 
जीवन का आधार  !

मैं  तो मानके चला हूँ 
मै था  !

बुरा मानु 
तो  इस बात का
की  
बता ना शका ज़माने को  !

 क्यों किया इतना 
एहसानमन्द  ?

लेने होंगे 
जनम कितने ,
चुकाने को  ?

मैं तो 
इस जनम के गमो से 
हारा हूँ   !

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21  April  2017



Tuesday, 18 April 2017

मधुबन के रास्ते




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पीले पलाश की चादर 
मधुबन के रास्ते 
किसने बिछाई ?

किसने आज 
पुकूर के किनारे ,
झंकार पायलकी 
सुनाई ?

किस फूल की 
चुराके फोरम,
हवा ये कैसी 
कहाँ से लहराई ?

तुम्हारे आने की  
लिए आश बैठा हूँ 



तुम्हारे जिस्म की महक ,
हर साँस में 
छा गयी है 

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19  April  2017

Friday, 14 April 2017

यादो से कैसे छूट पाओगी ?




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क्या कभी कहा था तूने ,

" मुझे याद ना कर ? "

कहती है मेरी वफ़ा ,

" इजाजत नहीं तुझे ;
  फ़रियाद ना कर  "

ख्वाबोंमें तो दामन छुड़ा कर 
चली जाती हो ;

यादो से कैसे छूट पाओगी  ?

मेरी वफाओ में 
खता ज़रूर है ,

पकड़ कर तुम्हारा हाथ 
क्यों छोड़ा  ?

'गर फरियाद हैं 
तो खुद से ;

तुमने तो ये भी कहा था ,

" साजन ,
मेरे साथ साथ चलोगे ना ? "

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15  April  2017