Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Monday, 6 July 2020

बुढ़ापा मेरा आ गया है

आ रहा है बुढ़ापा ,

आँखों के झरोखों से लेकर 
पैरों की एडी तक ,
दुखावा छा रहा है ;

जब हिलने लगे दांत 
और दिए बिना संकेत 
गिरने लगे ,

तब कानों ने कहा ,

"हमने तो नहीं सूना 
गिरने का आवाज़ ,
'गर कहना चाहो कुछ 
तो कहो जरा ऊँचे आवाज़ ",

ज़ुल्फो ने कहा ,

"अब ना पसंद हमे रंग श्याम ,
रहने भी दो संवारना केश काले ,
अब तक न बना कुछ काम, 
होने दो अब 
बाल सफ़ेद तमाम "

तब बोली आंखे ,

" हुई ना ये बात 
हमने तो कभी  का छोड़ा 
रंगो का साथ ,
देख भी पाऊं आयने में खुद को 
तो हमे ना कोई ऐतराज "


कम्मर पर आयी लचक 
तो क्या हुआ ?
हड्डिया भी तो 
एक एक कर मचकने लगी ,
गिला किन किन का करे ? 

होता है जो दिन के पहले प्रहर 
रहे न पाता है यादो में दोपहर ,

क्यों पूछते हो 
" क्या कहा तुमने ? "

मैं तो चुप हूँ 

मन ही मन में 
करते हो सवाल खुद को 
और जवाब भी  देते हो  !

सून कर 
बुड्ढा और बुढ़िया के झगड़े, 
बोला बुढ़ापा ,

" अगर याद भी नहीं 
किसने क्या पूछा,कब पूछा 
तो फिर फ़रियाद क्यों ? "

बढ़ी जो पेट में गड़बड़ 
तो घटी भी है 
दिलों की धड़कन ;

जब न रहा फर्क कोई 
दुर्गन्ध और सुगंध में, 
और जीभ न पहेचान पाए 
स्वाद और बेस्वाद के सन्दर्भ ,

तब तो क़बूलो 
यौवन जा रहा है 
बुढ़ापा आ रहा है  !


घर के आँगन को 
पार न कर पाते हो ?
प्रियजनों से 
मिला न हाथ पाते हो ?

करोना किक्र,
ये भी क्या कम है की   
Facebook पर हज़ारो अजनबी को 
" like " कर  पाते हो !

कौन कहेगा बुढ़ापा को ,

" अरे भाई ,
इतनी जल्दी भी क्या है ?

वापस जाओ 
ना हम तैयार ,
'गर वापस न जा सको तो 
थोड़ी देर ठहर जाओ ,

और ठहर सको ना तो 
जरा आहिस्ते आओ "

बुढ़ापा मेरा आ गया है 
आते ही 
मन को भा गया है ;


भैया मेरे, 
भूलना मत 
जरा ध्यान से सुनो ,

बुढ़ापा तुम्हारा भी 
कुछ सुस्त कदम 
आहिस्ते आहिस्ते 
आ रहा है 

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06 July 2020

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Saturday, 5 December 2015


ધીમે પગે આવી રહ્યો છે !


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બુઢાપો આવી રહ્યો છે ,


આંખની અટારી થી 
પગ ની પાની સુધી 
દુખાવો છાયી રહ્યો છે  ;

દાંત ડગ-મગ્યા , તો 
ઉંચે સાદે 
કાન માં કહેવાનો 
જમાનો આવી ગયો છે ;

મટી કાળા 
થયાં કેશ ધોળાં ,
'ને કૈંક આછા થયાં 
આંખ માં અજવાળા ;

કમર થઇ કડક 
ને 
હાડકા થયા બરડ ,
વાયરા સંધિવા નાં 
અંગ અંગ વાયી રહ્યાં છે  ;

" તમે શું કહ્યું તું સવારે ? "
એ ભૂલવા નો બપોરે 
મહાવરો ફાવી ગયો છે  ;

હજુ તો હમણાં કહ્યું  !
પણ યાદ ક્યાં રહ્યું  ?

એવી ફરિયાદ નો લવારો 
લાવી રહ્યો છે  ;

મચી જો પેટ માં ગડબડ 
તો 
ઘટી પણ છે , દિલ ની ધડકન ,

સુગંધ શું  ?
સ્વાદ શું  ?

અરે , આતો 
વાતો યૌવન ની 
ભૂલાવી રહ્યો છે  !

શું કહ્યું  ?
ઉંબર થયા ડુંગર  ?

ફિકર નાં  !
facebook ના સ્નેહી જનો 
ફાવી ગયા છે  !

કોણ કહેશે  , જરાને ,
"  પછી જા "  ?

અમારો તો બુઢાપો આવી ગયો છે ,
આવતા ની સાથ ભાવી ગયો છે  !

ભૂલશો માં ,

માંડશો કાન તો ,
તમારો પણ 
ધીમે પગે 
આવી રહ્યો છે  !