Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Monday, 30 October 1978

जो वादे तुमसे किये है


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अकेला हूँ

      मुज़े समज़ने की
      कोशिश मत करो  --

क्या आसमान
किसी की रहम पर
जीता है  ?

      तुम्हारे साये के
      अँधेरे में
      चला जा रहा हूँ ,

तुम्हारे लिए
क्या येही काफी नहीं  ?

      कभी सोचता हूँ ,
     क्या तुम शमा हो के
     जलना पसंद करती  ?

जब खुद
तुम्हारे दिए की
बाती न बन पाया ;

      बेमुनासिब इन सवालातो से
      तुम्हारे गमो को
      क्यूँ छिडकता हूँ  ?

मेरे गुनाहों की सज़ा
मुजे मिलने दो ,

तड़पती हुई तन्हाइओकि
आगमे
मुज़े सुलगने  दो ;

      कसूर मेरा है  --

      मुहब्बत की कसमे मैंने खायी है ,

      जो वादे तुमसे किये है
      वो पूरे हो जायेंगे  --

इससे बढ़कर
मुजको समज़ने
बेकार बाते मत करो


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दिवाली

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Monday, 9 October 1978

मैं क्यूँ पह्चानु ?


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तुम मेरे खयालो में
तड़पती हो
येही सोच के
मै
जीता हु !

मेरे ख्वाब के संसार को
सवांर ना शको तो
ना ही सही  !

उजाड़ना नहीं ;

     हो शकता है
     जो फूल तुमने मुज़े दिए
     वो कागज़ के हो --

मैं क्यूँ पह्चानु ?

क्या तुमने पहचाना
रंग ,
मेरी आँख के आंसू ओ का  ?

     हो शकता है
     वो
     मेरे जिगर का खून हो  ! !

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09  Oct  1978

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Friday, 6 October 1978

पल्ला मेरा जूक़ जायेंगा


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उठाओगी तराजू  ?

      मेरी नि:सिम  वेदनाओको
      तुलने
      तुम्हारे पास है क्या  ?

 जिसे रखहा है संभल
जिम्मेवारी की गठरिया ,
ऊपर उठ जायेगी  ;

      पल्ला मेरा जूक़ जायेंगा  ;

आँख से गिरा जो
पल्ले में ,
आहके दो
बदनसीब आंसू

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06  Oct  1978

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Thursday, 5 October 1978

न मिले राहबर


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धुन्ढ़ते धुन्ढ़ते  तुम्हे
खुद हुआ गुमराह ;

उठाये आँख आभ की और
रातभर खोजता रहा

तारक दो
तुम्हारे नैनन के  !

न मिले राहबर  --

सोचता रहा ,

पिया बिन क्या
बित जाएगी
रैना  ?


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