Hi Friends,

Even as I launch this today ( my 80th Birthday ), I realize that there is yet so much to say and do.

There is just no time to look back, no time to wonder,"Will anyone read these pages?"

With regards,
Hemen Parekh
27 June 2013

Monday, 19 March 2018

ये भी तो सोचो



_____________________________________________________

चंपा से गिरा एक फूल 
वो  चमेली  ने  झेला ,

चमेली खिल उठी  !

अगर तुम्हारी पलकों से 
गिरा मेरा दिल 
तो क्या दामन पर ज़ेलोगी  ?

ये भी तो सोचो 
दामन कैसा झूम जायेगा  !

=========================

20  March  2018

Monday, 5 March 2018

ज़ख्म गहरे होते चले है



______________________________________________________
अब दिल थक चुका है  ;

वो जानता है उस मालिक को 
जो बंधनो को काटता है ,

मगर मानता है उस को 
जो बंधनो से बांधता है  -

जिसकी ज़ंजीरो ने 
उम्र को जकड रख्हा है ;

और जिसके घाव से 
ज़ख्म गहरे होते चले है ;


क्या आएगा कभी 
वो समय 
जो 
मरहम लगाएगा  ?

===================
05  March  2018

From original "  Enslaving Master " of  25  May  1959

_____________________________________________________